सूझ विधि/अंतर्दृष्टि सिद्धांत/गेस्टाल्ट वाद सिद्धांत (Insight Learning Theory) - विस्तृत व्याख्या।

सूझ विधि/अंतर्दृष्टि सिद्धांत/गेस्टाल्ट वाद सिद्धांत (Insight Learning Theory) - विस्तृत व्याख्या

मनोविज्ञान के अंतर्गत सीखने की प्रक्रिया को समझने के लिए सूझ विधि/अंतर्दृष्टि सिद्धांत/गेस्टाल्ट वाद सिद्धांत का विशेष स्थान है। इस सिद्धांत का प्रतिपादन प्रसिद्ध गेस्टाल्ट वादियों द्वारा किया गया था, इसलिए इसे 'गेस्टाल्ट सिद्धांत' के नाम से भी जाना जाता है। गेस्टाल्ट सिद्धांत मूल रूप से एक जर्मन विचारधारा है, जिसका उदय सन 1912-1920 के आसपास हुआ था।

इस विचारधारा के प्रवर्तक मेक्सी वर्दीमर (Max Wertheimer) थे। बाद में उनके सहयोगियों कोहलर (Wolfgang Kohler) तथा कोफका (Kurt Koffka) ने इस सिद्धांत को आगे बढ़ाने और प्रयोगों के माध्यम से सिद्ध करने का महत्वपूर्ण कार्य किया। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ये मनोवैज्ञानिक अमेरिका चले गए, जिससे इस सिद्धांत का वैश्विक प्रसार हुआ।

गेस्टाल्ट (Gestalt) का अर्थ और परिभाषा

गेस्टाल्ट किसी व्यक्ति या स्थान का नाम नहीं है, बल्कि यह जर्मनी भाषा का एक शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है— समग्राकृति, पूर्ण आकार या पूर्णाकार। इस सिद्धांत का मुख्य मानना है कि व्यक्ति किसी भी वस्तु या परिस्थिति को टुकड़ों (अंशों) में नहीं, बल्कि पूर्ण रूप (Whole) में देखता और सीखता है।

गेस्टाल्ट वादियों के अनुसार, "संपूर्ण अपने भागों के योग से कहीं बड़ा होता है।" यह स्कूल सांख्यिकी या टुकड़ों में सीखने में विश्वास नहीं करता, बल्कि समाकृतिका के सिद्धांत और मनोवैज्ञानिक वातावरण पर बल देता है।

कोहलर के सिद्धांत का अर्थ (Meaning of Kohler's theory)

कोहलर का सिद्धांत बताता है कि प्राणी जो कुछ भी सीखता, सुनता या अनुभव करता है, उसके मस्तिष्क में उसकी एक पूर्ण आकृति बनती है। जब भी कोई व्यक्ति किसी नवीन परिस्थिति या समस्या के सामने आता है, तो वह उसके विभिन्न अंगों के बीच पारस्परिक संबंध स्थापित करता है।

परिस्थिति को पूर्णता में समझ लेना ही सूझ (Insight) कहलाती है। यह सूझ अचानक आती है। उदाहरण के लिए:

  • ऊंचे स्थान पर रखी मिठाई को प्राप्त करने के लिए बालक द्वारा मेज या कुर्सी का अचानक प्रयोग करना।
  • एक इंजीनियर द्वारा अपनी सूझ से विशाल भवन का नक्शा तैयार करना।
  • युद्ध स्थल पर सेनापति द्वारा अचानक रणनीति बदलकर विजय प्राप्त करना।

विद्वान कोफका के अनुसार, सूझ में व्यक्ति हाथ-पैरों की अपेक्षा चिंतन, तर्क और कल्पना का अधिक सहारा लेता है। इसे कई मनोवैज्ञानिक 'आहा' (Aha! Experience) अनुभव भी कहते हैं, क्योंकि इसमें समाधान बिजली की तरह अचानक दिमाग में कौंधता है।

गेस्टाल्ट सिद्धांत के प्रमुख नियम (Laws of Perception)

नियम का नाम विवरण उदाहरण
संरचनात्मकता (Law of Figure-Ground) हम समग्र को सबसे पहले देखते हैं। छोटे दोषों पर ध्यान नहीं जाता। पूरे चेहरे को एक साथ देखना, न कि अलग-अलग नाक-कान।
समानता (Law of Similarity) समान आकार, रंग और चमक वाली वस्तुएं जल्दी संगठित होती हैं। फोटो देखकर व्यक्ति की याद आना।
समीपता (Law of Proximity) पास स्थित वस्तुएं एक समूह के रूप में देखी जाती हैं। बिंदुओं का समूह जो पास हैं, रेखा की तरह दिखना।
समापन (Law of Closure) अधूरी आकृतियों को हमारा मस्तिष्क पूर्ण मानकर देखता है। टूटे हुए वृत्त को पूरा वृत्त समझना।
निरंतरता (Law of Continuity) निरंतरता वाले अवयव आसानी से स्मृतियों में जुड़ जाते हैं। आम देखकर उसके स्वाद और सुगंध का स्मरण होना।

कोहलर का प्रयोग (Kohler's Experiment on Sultan)

कोहलर का प्रयोग (Kohler's Experiment on Sultan)

कोहलर ने अपना सबसे प्रसिद्ध प्रयोग 'सुल्तान' नामक एक चिंपैंजी पर किया था। कोहलर ने कुल 6 चिंपैंजी पर प्रयोग किए थे, लेकिन सुल्तान सबसे बुद्धिमान था।

1. बॉक्स समस्या (Box Problem):

एक भूखे चिंपैंजी (सुल्तान) को कमरे में बंद कर दिया गया और छत पर केले लटका दिए गए। कमरे में कुछ खाली बॉक्स भी रखे थे। सुल्तान ने उछलकर केले प्राप्त करने की कोशिश की लेकिन असफल रहा। थककर बैठने के बाद अचानक उसकी सूझ ने काम किया। उसने एक बॉक्स पर दूसरा बॉक्स रखा और ऊंचाई बढ़ाकर केले प्राप्त कर लिए।

2. छड़ी का प्रयोग (Stick Problem):

सुल्तान को पिंजरे में बंद किया गया और केले पिंजरे के बाहर रखे गए। पास में दो छड़ियाँ रखी थीं जो एक-दूसरे में फिट हो सकती थीं। सुल्तान ने पहले एक छड़ी से केले खींचने की कोशिश की, पर छड़ी छोटी थी। अंततः उसने अपनी मानसिक शक्ति का प्रयोग किया और दोनों छड़ियों को जोड़कर केलों को प्राप्त कर लिया।

महत्वपूर्ण बिंदु: गेस्टाल्ट वाद का सार

  • गेस्टाल्ट वाद: जब तक समस्या दिखाई नहीं पड़ती, तब तक हल नहीं होगा।
  • प्रतिपादक: वर्दीमर (1912)
  • प्रयोगकर्ता: कोहलर (सुल्तान पर प्रयोग)
  • अन्य नाम: संपूर्णवाद, समग्रवाद, अवयववाद सिद्धांत।
  • शिक्षण सूत्र: संपूर्ण से अंश की ओर (Whole to Part)।

शिक्षा के क्षेत्र में महत्व और विशेषताएं

सिद्धांत की मुख्य विशेषताएं:

  1. सीखने की प्रक्रिया संज्ञानात्मक (Cognitive) होती है।
  2. सीखने की प्रक्रिया धीरे-धीरे न होकर अचानक होती है।
  3. सूझ के लिए समस्या का संपूर्ण रूप में सामने होना अनिवार्य है।

शिक्षा में उपयोगिता:

  • यह सिद्धांत बालकों में कल्पना, तुलना, तर्क और चिंतन शक्ति का विकास करता है।
  • गणित, विज्ञान और व्याकरण जैसे कठिन विषयों को सीखने में सूझ विधि अत्यंत प्रभावी है।
  • समस्या समाधान विधि (Problem Solving Method) और विश्लेषण विधि का जन्म इसी सिद्धांत से हुआ है।
  • यह रटने की प्रवृत्ति को खत्म कर समझ विकसित करने पर बल देता है।

FAQ - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: 'गेस्टाल्ट' शब्द का क्या अर्थ है?
उत्तर: गेस्टाल्ट एक जर्मन शब्द है जिसका अर्थ 'समग्र' या 'पूर्ण आकृति' होता है।

प्रश्न 2: कोहलर ने किस जानवर पर प्रयोग किया था?
उत्तर: कोहलर ने 'सुल्तान' नामक चिंपैंजी (वनमानुष) पर अपना प्रयोग किया था।

प्रश्न 3: सूझ का सिद्धांत किसने दिया?
उत्तर: इस सिद्धांत के मुख्य प्रवर्तक मैक्स वर्दीमर थे, और प्रयोग कोहलर ने किए थे।

प्रश्न 4: गेस्टाल्ट वादी किस शिक्षण सूत्र का समर्थन करते हैं?
उत्तर: वे 'संपूर्ण से अंश की ओर' (Whole to Part) सूत्र का समर्थन करते हैं।

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निष्कर्ष

अंततः, कोहलर का सिद्धांत हमें यह सिखाता है कि सीखना केवल अभ्यास या प्रयास-त्रुटि नहीं है, बल्कि यह हमारी मानसिक शक्ति और अंतर्दृष्टि का खेल है। शिक्षक के रूप में हमें छात्रों के सामने समस्या को पूर्ण रूप में प्रस्तुत करना चाहिए ताकि वे अपनी सूझ का प्रयोग कर सकें।

आशा है कि "Hindi Trainer" का यह लेख आपकी परीक्षाओं (TGT, CTET, UPTET) के लिए अत्यंत उपयोगी सिद्ध होगा। यदि आपको जानकारी अच्छी लगी हो, तो कमेंट में अपना फीडबैक जरूर दें।

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