एथलेटिक्स गेम का इतिहास और पूरी जानकारी
Athletics Game Information: History, Rules, and Events in Hindi
एथलेटिक्स क्या है? (Athletics history in hindi)
Athletics history in hindi: यूनानी भाषा के एथानोली शब्द से एथलेटिक्स बना है। एथानोली शब्द का अर्थ है स्पर्धा या प्रतियोगिता। सबसे प्राचीनतम खेलों में से एथलेटिक खेल है। एथलेटिक खेल प्राकृतिक क्रिया और मानव क्रिया पर आधारित है जैसे- चलाना, कूदना, दौड़ना, फेंकना आदि। उपरोक्त लाइनों से स्पष्ट होता है कि एथलेटिक खेल अत्यंत प्राचीन खेल है।अत्यधिक प्राचीन होने के कारण विश्व में एथलेटिक खेल अत्यधिक लोकप्रिय है। सभी देश इस खेल को रोमांचक तरीके से खेलते हैं। विश्व लोकप्रिय होने के कारण इस एथलेटिक्स को "खेलों की रानी" (Queen of Games) के नाम से जाना जाता है। अमेरिका में एथलेटिक्स खेल का तात्पर्य सभी क्रियाओं से है। अमेरिका में एथलेटिक्स खेल खाली समय में प्रतिबंधात्मक खेल के रूप में खेला जाता है। एथलेटिक्स को Track and Field Event तकनीकी नाम से भी जाना जाता है।
12वीं शताब्दी में इंग्लैंड में इसे एथलेटिक्स कहा जाने लगा था। 154 ईस्वी में इंग्लैंड में एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। जबकि 1849 ईस्वी में संगठित रूप से एथलेटिक्स प्रतियोगिता का आयोजन वुलविन मिल्टरी एकेडमी, लंदन में किया गया।
भारत में एथलेटिक्स का इतिहास
भारत में एथलेटिक्स (Athletics) का इतिहास बहुत प्राचीन है। एथलेटिक्स एक ऐसा खेल है जिसमें विभिन्न प्रकार के दौड़, छलांग और उछाल का मानकीकरण होता है। भारतीय एथलेटिक्स के इतिहास में कई महत्वपूर्ण और प्रशंसायोग्य क्षण हुए हैं। भारतीय एथलेटिक्स का आरम्भ प्राचीन काल में ही हुआ था।
वैदिक काल: भारतीय पुराणों और कथाओं में भी एथलेटिक्स के उल्लेख मिलते हैं। इसके अलावा, भारतीय महाकाव्य रामायण और महाभारत में भी अर्जुन और भीम जैसे महान योद्धाओं की दौड़ और उछाल की कथाएं दर्शाई गई हैं।
मुग़लकाल: यह भारतीय एथलेटिक्स विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था। मुग़ल सम्राट अकबर का खास रुझान एथलेटिक्स की ओर था और वह इसे बड़ी प्राथमिकता देता था। उसने अपने दरबार में अद्वितीय प्रदर्शनों का आयोजन करवाया था जिसमें विभिन्न प्रकार के खेल शामिल थे।
आधुनिक विकास: आधुनिक भारत में एथलेटिक्स का विकास ब्रिटिश शासनकाल में हुआ। ब्रिटिश सत्ता के समय भारतीय एथलीट्स ने उच्च प्रदर्शन स्तर प्राप्त किया और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया। स्वतंत्रता संग्राम के समय और भारत के स्वतंत्र होने के बाद, एथलेटिक्स को और अधिक महत्व मिला। आज भारतीय एथलीट्स ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे महत्वपूर्ण खेलों में मेडल जीतने के लिए प्रयासरत रहते हैं।
वैदिक काल: भारतीय पुराणों और कथाओं में भी एथलेटिक्स के उल्लेख मिलते हैं। इसके अलावा, भारतीय महाकाव्य रामायण और महाभारत में भी अर्जुन और भीम जैसे महान योद्धाओं की दौड़ और उछाल की कथाएं दर्शाई गई हैं।
मुग़लकाल: यह भारतीय एथलेटिक्स विकास का एक महत्वपूर्ण चरण था। मुग़ल सम्राट अकबर का खास रुझान एथलेटिक्स की ओर था और वह इसे बड़ी प्राथमिकता देता था। उसने अपने दरबार में अद्वितीय प्रदर्शनों का आयोजन करवाया था जिसमें विभिन्न प्रकार के खेल शामिल थे।
आधुनिक विकास: आधुनिक भारत में एथलेटिक्स का विकास ब्रिटिश शासनकाल में हुआ। ब्रिटिश सत्ता के समय भारतीय एथलीट्स ने उच्च प्रदर्शन स्तर प्राप्त किया और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पालन किया। स्वतंत्रता संग्राम के समय और भारत के स्वतंत्र होने के बाद, एथलेटिक्स को और अधिक महत्व मिला। आज भारतीय एथलीट्स ओलंपिक और कॉमनवेल्थ गेम्स जैसे महत्वपूर्ण खेलों में मेडल जीतने के लिए प्रयासरत रहते हैं।
ओलंपिक का उद्घाटन समारोह (Opening Ceremony)
VIP अतिथियों का मेजबान देश की ओलंपिक दीर्घा में प्रवेश होता है जिसमें पिछले ओलंपिक के कुल मेडल टैली में प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान पर आए हुए देशों के राष्ट्राध्यक्ष होते हैं। अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) का अध्यक्ष अतिथियों का स्वागत करता है। मेजबान देश के राष्ट्राध्यक्ष के प्रवेश करते ही राष्ट्रगान बजाया जाता है।
मार्च पास्ट: इसमें देशों का क्रम सबसे आगे ग्रीस, सबसे पीछे मेजबान देश तथा बाकी सभी देश अल्फाबेटिकल (A-Z) क्रम में होते हैं। इसके उपरांत उद्घाटन की घोषणा की जाती है, तोप से सलामी दी जाती है और ओलंपिक ध्वज फहराया जाता है।
खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशिक्षकों (Coaches) द्वारा शपथ ली जाती है। अंत में मेजबान देश का चर्चित खिलाड़ी जलती हुई मशाल लेकर स्टेडियम में प्रवेश करता है और ज्वाला प्रज्वलित करता है।
मार्च पास्ट: इसमें देशों का क्रम सबसे आगे ग्रीस, सबसे पीछे मेजबान देश तथा बाकी सभी देश अल्फाबेटिकल (A-Z) क्रम में होते हैं। इसके उपरांत उद्घाटन की घोषणा की जाती है, तोप से सलामी दी जाती है और ओलंपिक ध्वज फहराया जाता है।
खिलाड़ियों, अधिकारियों और प्रशिक्षकों (Coaches) द्वारा शपथ ली जाती है। अंत में मेजबान देश का चर्चित खिलाड़ी जलती हुई मशाल लेकर स्टेडियम में प्रवेश करता है और ज्वाला प्रज्वलित करता है।
नोट - 1 सबसे पहले 1928 एमस्टरडम ओलंपिक (हॉलैंड) में ज्वाला जलाई गई। ओलंपिक मशाल को विभिन्न महाद्वीपों से होते हुए आयोजन स्थल तक लाने की शुरुआत 1936 बर्लिन ओलंपिक से हुई। इसका श्रेय बर्लिन ओलंपिक की आयोजन समिति (OCOG) के अध्यक्ष को जाता है। 1936 से ही विजेताओं के नाम स्टेडियम की दीवारों पर लिखे जाने लगे।
नोट - 2 एथलेटिक्स को Track and Field स्पर्धा में वर्गीकृत किया गया है।
एथलेटिक्स के प्रकार (Types of Athletics)
1. Track Events (दौड़)
- साधारण दौड़: 100M, 200M, 400M (कम दूरी); 800M, 1500M (मध्य); 5000M, 10000M व मैराथन 42.195 KM (लंबी)।
- बाधा दौड़: 100M (महिला), 110M (पुरुष), 400M व 3000M पानी बाधा दौड़।
- रिले दौड़: 4x100M और 4x400M।
- पैदल चाल
2. Field Events (कूद व फेंक)
(क) कूद स्पर्धा: ऊंची कूद, लंबी कूद, बाँस कूद (Pole Vault), त्रिकूद (Triple Jump)।
(ख) प्रक्षेपण (Throwing) स्पर्धा: भाला फेंक, चक्र फेंक, गोला फेंक, तार गोला फेंक।
एथलेटिक्स महत्वपूर्ण जानकारी (Quick Facts)
| विवरण | जानकारी / वर्ष |
|---|---|
| जन्मदाता देश | ग्रीस |
| विश्व एथलेटिक्स संघ स्थापना | 1912 |
| भारतीय एथलेटिक्स संघ स्थापना | 1946 (बेंगलुरु) |
| विश्व की प्रथम प्रतियोगिता | 776 BC (ओलंपिया, ग्रीस) |
| भारत की प्रथम प्रतियोगिता | 1924 (दिल्ली) |
| ओलंपिक में शामिल | 1896 (एथेंस) |
| एशियाई खेलों में शामिल | 1951 (नई दिल्ली) |
| वर्तमान अध्यक्ष (AFI) | आदिल सुमारिवाला |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. एथलेटिक्स को 'खेलों की रानी' क्यों कहा जाता है?
एथलेटिक्स सबसे प्राचीन और लोकप्रिय खेल है जिसमें मानव की प्राकृतिक क्रियाओं (दौड़ना, कूदना, फेंकना) का समावेश होता है, इसलिए इसे 'खेलों की रानी' कहा जाता है।
2. मैराथन दौड़ की कुल दूरी कितनी होती है?
आधिकारिक मैराथन दौड़ की दूरी 42.195 किलोमीटर (26.2 मील) होती है।
3. भारतीय एथलेटिक्स संघ (AFI) की स्थापना कब हुई?
भारतीय एथलेटिक्स संघ की स्थापना वर्ष 1946 में बेंगलुरु में हुई थी।
निष्कर्ष (Conclusion)
एथलेटिक्स (Athletics) केवल एक खेल नहीं, बल्कि मानव शक्ति, गति और सहनशीलता का सर्वोच्च प्रदर्शन है। प्राचीन यूनान से शुरू होकर आधुनिक ओलंपिक तक का इसका सफर यह दर्शाता है कि यह खेल मानवीय विकास के साथ-साथ और भी वैज्ञानिक और रोमांचक होता गया है।
इसे 'खेलों की रानी' कहना पूर्णतः सार्थक है, क्योंकि यह दुनिया की हर खेल स्पर्धा का आधार (Base) है। चाहे वह 100 मीटर की फर्राटा दौड़ हो या मैराथन की लंबी दूरी, एथलेटिक्स हमें अनुशासन और निरंतर सुधार की प्रेरणा देता है। भारत में भी नीरज चोपड़ा जैसे एथलीटों की वैश्विक सफलता ने इस खेल के प्रति युवाओं में एक नई ऊर्जा भरी है। सही तकनीक, कड़े अभ्यास और नियमों के पालन से एथलेटिक्स के क्षेत्र में स्वर्णिम भविष्य बनाया जा सकता है।
इसे 'खेलों की रानी' कहना पूर्णतः सार्थक है, क्योंकि यह दुनिया की हर खेल स्पर्धा का आधार (Base) है। चाहे वह 100 मीटर की फर्राटा दौड़ हो या मैराथन की लंबी दूरी, एथलेटिक्स हमें अनुशासन और निरंतर सुधार की प्रेरणा देता है। भारत में भी नीरज चोपड़ा जैसे एथलीटों की वैश्विक सफलता ने इस खेल के प्रति युवाओं में एक नई ऊर्जा भरी है। सही तकनीक, कड़े अभ्यास और नियमों के पालन से एथलेटिक्स के क्षेत्र में स्वर्णिम भविष्य बनाया जा सकता है।
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