भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत में महाकुंभ मेला एक अद्वितीय स्थान रखता है। यह न केवल दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र भी। सभी जाति के लोग एक साथ एक घाट पर स्नान करते है न कोई जातिपात न कोई छुआछूत। लेकिन क्या आप जानते हैं कि महाकुंभ कितने साल में आता है? आइए हम महाकुंभ के चक्र, इसके इतिहास, और शिवरात्रि के अंतिम शाही स्नान के बारे में विस्तार से जानें।
महाकुंभ मेला क्या है और यह कितने साल में आता है?
महाकुंभ मेला हिंदू धर्म का सबसे पवित्र त्योहार माना जाता है, जो चार पवित्र नदियों के तट पर आयोजित होता है
- प्रयागराज (गंगा, यमुना, सरस्वती संगम)
- हरिद्वार (गंगा नदी)
- नासिक (गोदावरी नदी)
- उज्जैन (क्षिप्रा नदी)
महाकुंभ का चक्र
हर 12 साल में एक ही स्थान पर महाकुंभ मेला लगता है।
चारों स्थानों का पूरा चक्र 48 वर्ष में पूरा होता है।
महाकुंभ और कुंभ में अंतर: सामान्य कुंभ हर 3 साल में होता है, जबकि महाकुंभ प्रत्येक स्थान पर 12 साल के बाद आता है।
अगला महाकुंभ 2025 में प्रयागराज में आयोजित होगा, जहां श्रद्धालु "संगम" में डुबकी लगाकर पापों से मुक्ति पाने आते हैं।
महाकुंभ मेला और शाही स्नान का महत्व
महाकुंभ के दौरान शाही स्नान (रॉयल बाथ) सबसे महत्वपूर्ण त्यौहार है। यह स्नान विशेष खगोलीय योगों पर होता है, जैसे:
- मकर संक्रांति
- पौष पूर्णिमा
- मौनी अमावस्या
- बसंत पंचमी
- शिवरात्रि
और अधिक जानकारी के लिए https://uptourism.gov.in/hi/article/kumbh-2025
शिवरात्रि का शाही स्नान: क्यों है खास?
उज्जैन के महाकुंभ में शिवरात्रि का स्नान सर्वाधिक महत्वपूर्ण माना जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले विष का पान किया था।
2028 में उज्जैन में होने वाले महाकुंभ में शिवरात्रि (मार्च 2028) पर मुख्य शाही स्नान होगा।
पिछला शिवरात्रि शाही स्नान 2016 में उज्जैन के महाकुंभ में हुआ था, जहां 5 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई थी ।
कुंभ मेला की ऑफिशियल अपडेट्स के लिए - https://prayagraj.nic.in
FAQs: महाकुंभ और शिवरात्रि से जुड़े सवाल
Q1. महाकुंभ और कुंभ में क्या अंतर है?
A - कुंभ हर 3 साल में होता है, जबकि महाकुंभ प्रत्येक स्थान पर 12 साल बाद आता है।
Q2. शिवरात्रि पर शाही स्नान कहाँ महत्वपूर्ण है?
A - उज्जैन के महाकुंभ में, जो बृहस्पति के सिंह राशि में आने पर आयोजित होता है।
Q3. अगला महाकुंभ कब और कहाँ होगा?
A - 2025 में प्रयागराज (इलाहाबाद) में।
निष्कर्ष
महाकुंभ मेला न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक एकता को भी दर्शाता है। शिवरात्रि के शाही स्नान का विशेष महत्व उज्जैन में देखने को मिलता है, जहां भक्त भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए एकत्र होते हैं। अगले महाकुंभ की तैयारियों के साथ, आशा करते है यह जानकारी आपके लिए उपयोगी साबित होगी।