बैडमिंटन दुनिया के सबसे चपल और लोकप्रिय खेलों में से एक है। इसे 'रैकेट और शटलकॉक' का खेल भी कहा जाता है। चाहे वह गली-मोहल्ले का शौक हो या ओलंपिक की प्रतिष्ठा, बैडमिंटन हर स्तर पर रोमांच पैदा करता है। इस लेख Badminton Court Measurement in Hindi में हम कोर्ट के सटीक माप, शटलकॉक की बनावट और इस खेल के गौरवशाली इतिहास पर विस्तार से चर्चा करेंगे।
मुख्य बिंदु (Table of Contents)
बैडमिंटन कोर्ट मेजरमेंट (Badminton Court Measurement)
बैडमिंटन का कोर्ट आयताकार होता है और इसे सिंगल्स (एकल) तथा डबल्स (युगल) के लिए अलग-अलग चौड़ाई में उपयोग किया जाता है। इसकी सटीक माप निम्नलिखित है:
- डबल्स हेतु लंबाई व चौड़ाई: 13.40 मीटर X 6.10 मीटर (44 फुट X 20 फुट)।
- सिंगल्स हेतु लंबाई व चौड़ाई: 13.40 मीटर X 5.18 मीटर (44 फुट X 17 फुट)।
- शॉर्ट सर्विस लाइन: नेट से इसकी दूरी 1.98 मीटर (6 फुट 6 इंच) होती है।
- नेट की ऊंचाई (मध्य में): जमीन से 1.524 मीटर (5 फुट)।
- नेट की ऊंचाई (खंभों पर): 1.55 मीटर (5 फुट 1 इंच)।
- लाइनों की मोटाई: सभी लाइनों की चौड़ाई 40 मिमी (लगभग 1.5 इंच) होती है।
शटलकॉक और रैकेट की तकनीकी जानकारी
बैडमिंटन में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों का मानक वजन और आकार खेल की गुणवत्ता को प्रभावित करता है:
- शटलकॉक (चिड़िया): इसका वजन 4.74 ग्राम से 5.58 ग्राम के बीच होना चाहिए। इसमें पंखों की संख्या 14 से 16 होती है।
- पंखों का व्यास: फैले हुए पंखों का अधिकतम व्यास 58 मिमी से 68 मिमी तक होता है।
- कार्क का व्यास: शटल के नीचे लगे कार्क का व्यास 25 मिमी से 28 मिमी (9/8 इंच) होता है।
- रैकेट: रैकेट की कुल लंबाई अधिकतम 680 मिलीमीटर होती है और इसके ऊपरी भाग (Head) की चौड़ाई 230 मिलीमीटर होती है।
अंक गणना और मैच के नियम (Scoring System)
बैडमिंटन में टॉस जीतकर खिलाड़ी सर्विस या कोर्टसाइड का चयन करते हैं। अंक गणना के आधुनिक नियम कुछ इस प्रकार हैं:
- मैच: एक मैच 3 गेमों का होता है। जो खिलाड़ी 2 गेम जीतता है, वह विजेता कहलाता है।
- पुरुष वर्ग: सामान्यतः 21 अंकों का गेम होता है (पुराने नियमों में 15 अंक थे)। यदि स्कोर 20-20 हो जाए, तो 2 अंकों की बढ़त जरूरी है।
- महिला वर्ग: 21 अंकों का गेम (पुराने नियमों में 11 अंक थे)।
- सर्विस अंक: केवल वही खिलाड़ी/टीम अंक प्राप्त कर सकती है जो सर्विस कर रही है (रैली स्कोरिंग सिस्टम में अब हर पॉइंट पर अंक मिलता है)।
सर्विस और खेल की त्रुटियाँ (Faults)
खेल के दौरान कुछ गलतियाँ 'फाल्ट' कहलाती हैं जिससे विपक्षी को अंक मिल जाता है:
- सर्विस फाल्ट: यदि शटल को कमर की ऊंचाई से ऊपर हिट किया जाए।
- फुट फाल्ट: यदि सर्विस के समय खिलाड़ी के पैर लाइनों को छुएं या जमीन के संपर्क में न रहें।
- नेट फाल्ट: खेल के दौरान खिलाड़ी का शरीर या रैकेट नेट को छू जाए।
- डबल हिट: एक ही खिलाड़ी द्वारा शटल को लगातार दो बार मारना।
बैडमिंटन खेल का इतिहास (History of Badminton)
बैडमिंटन की जड़ें बहुत पुरानी हैं। इतिहासकारों का मानना है कि इसका विकास प्राचीन यूनान और मिस्र के खेल 'बेटल डोर' और 'शटल कॉक' से हुआ है। भारत के दृष्टिकोण से यह बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक बैडमिंटन का जन्म 18वीं शताब्दी में भारत के पुणे (Poona) शहर में हुआ था।
ब्रिटिश सैनिक अधिकारी पुणे में इस खेल को खेलते थे, इसलिए इसे 'पूना' के नाम से भी जाना जाता था। 1860 के दशक में जब ये अधिकारी वापस इंग्लैंड गए, तो वे अपने साथ शटलकॉक के उपकरण भी ले गए। 1873 में ड्यूक ऑफ ब्यूफोर्ट ने अपने आवास 'बैडमिंटन हाउस' में एक पार्टी के दौरान इस खेल को पेश किया, जिससे इसका नाम 'बैडमिंटन' पड़ गया।
1893 में 'इंग्लैंड बैडमिंटन एसोसिएशन' बना और 1934 में विश्व बैडमिंटन संघ (BWF) की स्थापना हुई। भारत में पहली प्रतियोगिता 1934 में कलकत्ता में आयोजित की गई थी।
प्रमुख राष्ट्रीय प्रतियोगिताएँ
भारत में बैडमिंटन के विकास के लिए कई ट्राफियां और टूर्नामेंट आयोजित किए जाते हैं:
| टूर्नामेंट का नाम | वर्ग |
|---|---|
| रहमतुल्लाह कप | राष्ट्रीय टीम (पुरुष) |
| चड्ढा कप | राष्ट्रीय टीम (महिला) |
| नारंग कप | जूनियर (पुरुष) |
| शफी कुरैशी कप | जूनियर (महिला) |
महत्वपूर्ण जानकारी (Quick Facts)
- 📍 BWF मुख्यालय: कुआलालंपुर (मलेशिया)
- 📍 भारतीय बैडमिंटन संघ (BAI) स्थापना: 1934
- 📍 पुरुषों की विश्व चैंपियनशिप: थॉमस कप (1948 से)
- 📍 महिलाओं की विश्व चैंपियनशिप: उबेर कप (1957 से)
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निष्कर्ष (Conclusion)
बैडमिंटन न केवल चपलता और गति का खेल है, बल्कि यह मानसिक एकाग्रता का भी परीक्षण करता है। आशा करते हैं कि इस लेख "Badminton Court Measurement in Hindi" से आपको कोर्ट के माप, वजन और इसके समृद्ध इतिहास की पूरी जानकारी मिल गई होगी।