भुजंगासन (Bhujangasana) कैसे करें? विधि, 10+ जबरदस्त लाभ और सावधानियां
योग विज्ञान में रीढ़ की हड्डी को लचीला और मजबूत बनाने के लिए भुजंगासन (Bhujangasana) को सबसे प्रभावशाली माना जाता है। इसे अंग्रेजी में "Cobra Pose Yoga" और हिंदी में 'सर्प आसन' भी कहा जाता है। इस आसन को करते समय हमारे शरीर की आकृति फन उठाए हुए एक सांप (कोबरा) जैसी बन जाती है, इसीलिए इसका नाम भुजंगासन पड़ा है।
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भुजंगासन क्या है? (What is Cobra Pose?)
भुजंगासन दो शब्दों के मेल से बना है—'भुजंग' जिसका अर्थ है सांप और 'आसन' जिसका अर्थ है मुद्रा। यह सूर्य नमस्कार के 12 चरणों में से सातवां चरण है। यह आसन फेफड़ों को खोलता है, हृदय को मजबूती देता है और पेट के आंतरिक अंगों को सक्रिय करता है।
भुजंगासन करने की विधि (Method of doing Bhujangasana)
योग का पूरा फायदा उठाने के लिए इसे सही स्टेप्स में करना बहुत जरूरी है। नीचे दी गई विधि का पालन करें:
- प्रारंभिक स्थिति: सबसे पहले साफ और समतल जगह पर चटाई बिछाकर पेट के बल (उल्टा) लेट जाएं।
- पैरों की स्थिति: अपने दोनों पैरों को आपस में जोड़ें और पंजों को बिल्कुल सीधा जमीन पर सटाकर रखें।
- हाथों की स्थिति: अपनी दोनों हथेलियों को छाती के बगल में पसलियों के पास रखें। ध्यान दें कि कोहनियां बाहर की तरफ न होकर आसमान की ओर उठी हुई हों।
- उठना: अब गहरी सांस भरते हुए धीरे-धीरे अपनी गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं और फिर हाथों के सहारे छाती वाले हिस्से को ऊपर उठाएं।
- दृष्टि: ऊपर की ओर देखने का प्रयास करें। नाभि से नीचे का हिस्सा जमीन पर सटा रहना चाहिए।
- अवधि: इस स्थिति में 20 से 30 सेकंड तक रुकें और सामान्य गति से सांस लेते रहें।
- वापसी: सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे शरीर को नीचे लाएं और माथे को जमीन पर स्पर्श कराएं।
भुजंगासन करने का सही समय
भुजंगासन का अभ्यास करने के लिए प्रातः काल (सुबह) का समय सबसे उत्तम माना जाता है।
- इसे खाली पेट ही करना चाहिए।
- यदि आपने भोजन कर लिया है, तो उसके कम से कम 3 से 4 घंटे बाद ही यह आसन करें।
- शांत और खुले स्थान पर अभ्यास करने से मानसिक शांति भी मिलती है।
भुजंगासन करने के 10+ जबरदस्त लाभ (Benefits)
नियमित अभ्यास से आप अपने शरीर में निम्नलिखित बदलाव महसूस करेंगे:
1. पेट की चर्बी कम करना: यह पेट की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है, जिससे बेली फैट कम करने में बहुत सहायता मिलती है।
2. कमर दर्द में राहत: रीढ़ की हड्डी को पीछे की ओर मोड़ने से लोअर बैक पेन में तुरंत आराम मिलता है।
3. रीढ़ की हड्डी में मजबूती: यह वर्टिब्रा को नई शक्ति देता है, जिससे बुढ़ापे तक रीढ़ की हड्डी लचीली बनी रहती है।
4. पाचन तंत्र (Digestion): यह जठराग्नि को तीव्र करता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत होता है और अपच दूरH होती है।
5. कब्ज से मुक्ति: पेट के अंगों पर दबाव पड़ने से पुरानी कब्जियत की समस्या समाप्त हो जाती है।
6. किडनी और लिवर के लिए: यह दोनों अंगों में रक्त संचार बढ़ाता है, जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ (Toxins) आसानी से बाहर निकल जाते हैं।
7. प्रजनन अंगों के लिए: पुरुषों में यह पौरुष शक्ति और शुक्राणुओं की संख्या बढ़ाने में सहायक है। वहीं महिलाओं में यह मासिक चक्र (Periods) की अनियमितता को दूर करता है।
8. लचीलापन: यह शरीर के ऊपरी भाग को स्ट्रेच करके उसे फुर्तीला बनाता है।
सावधानियां (Precautions)
योग लाभ तभी देता है जब सावधानी बरती जाए:
- हर्निया: हर्निया के मरीजों या हाल ही में ऑपरेशन कराने वालों को यह आसन नहीं करना चाहिए।
- तीव्रता: कभी भी झटके के साथ ऊपर न उठें। सांसों की गति के साथ तालमेल बिठाएं।
- गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को पेट के बल किए जाने वाले इस आसन से पूरी तरह बचना चाहिए।
- संख्या: शुरुआती दौर में इसे केवल 3 से 5 बार ही करें, फिर धीरे-धीरे संख्या बढ़ाएं।
वीडियो ट्यूटोरियल: भुजंगासन कैसे करें
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ Schema)
निष्कर्ष: भुजंगासन न केवल आपके शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि यह किडनी, लिवर और प्रजनन अंगों के लिए एक टॉनिक की तरह काम करता है। यदि आप भी एक स्वस्थ जीवन जीना चाहते हैं, तो आज से ही अपने दैनिक जीवन में भुजंगासन को शामिल करें।