सूर्य नमस्कार कैसे करते हैं | Surya Namaskar Steps, मंत्र, लाभ और सावधानियां (2026 Complete Guide)
सूर्य नमस्कार कैसे करते हैं : सूर्य देव को नमस्कार अर्पण करना ही सूर्य नमस्कार कहलाता है। सूर्य नमस्कार 12 आसनों का एक कंप्लीट पैकेज है। सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक और मानसिक रूप से दोनों तरह से व्यक्ति स्वस्थ रहता है। योग विज्ञान के अनुसार यदि प्रतिदिन प्रातःकाल सूर्य नमस्कार किया जाए तो शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं, मानसिक तनाव कम होता है और शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
प्रातः काल के समय सूर्य नमस्कार करना शरीर और मन को स्वस्थ रखने में बहुत ही लाभप्रद माना गया है। भारतीय 6 शास्त्रों में से एक शास्त्र योग शास्त्र है जिसे महर्षि पतंजलि द्वारा लिखा गया है। योग शास्त्र के अनुसार यदि सूर्य नमस्कार प्रतिदिन किया जाए तो इससे आयु, विद्या, यश, वीर्य और बल की वृद्धि होती है।
सूर्य नमस्कार क्या है? (What is Surya Namaskar)
सूर्य नमस्कार योग का एक महत्वपूर्ण अभ्यास है जिसमें 12 योगासनों का क्रमबद्ध अभ्यास किया जाता है। इसे अंग्रेजी में Sun Salutation कहा जाता है। सूर्य नमस्कार करने से शरीर की लगभग सभी मांसपेशियां सक्रिय हो जाती हैं और यह पूरे शरीर का एक बेहतरीन व्यायाम माना जाता है।
यदि 12 आसनों के साथ 12 मंत्रों का जाप किया जाए तो इसका आध्यात्मिक प्रभाव भी बढ़ जाता है और साधक को आत्मिक सुख की अनुभूति होती है।
सूर्य नमस्कार के 12 मंत्र
नित्य प्रातः काल सूर्य नमस्कार के साथ इन मंत्रों का उच्चारण किया जाए तो शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से व्यक्ति बलवान बनता है।
| क्रम | मंत्र | अर्थ |
|---|---|---|
| 1 | ॐ मित्राय नमः | सभी का मित्र बनने वाले सूर्य को नमस्कार |
| 2 | ॐ रवये नमः | प्रकाश देने वाले सूर्य को नमस्कार |
| 3 | ॐ सूर्याय नमः | सभी को ऊर्जा देने वाले सूर्य को नमस्कार |
| 4 | ॐ भानवे नमः | प्रकाश फैलाने वाले सूर्य को नमस्कार |
| 5 | ॐ खगाय नमः | आकाश में विचरण करने वाले सूर्य को नमस्कार |
| 6 | ॐ पुष्णे नमः | पोषण करने वाले सूर्य को नमस्कार |
| 7 | ॐ हिरण्यगर्भाय नमः | सृष्टि के स्रोत सूर्य को नमस्कार |
| 8 | ॐ मरीचये नमः | किरणों वाले सूर्य को नमस्कार |
| 9 | ॐ आदित्याय नमः | आदिति के पुत्र सूर्य को नमस्कार |
| 10 | ॐ सवित्रे नमः | सृजन करने वाले सूर्य को नमस्कार |
| 11 | ॐ अर्काय नमः | ऊर्जा के स्रोत सूर्य को नमस्कार |
| 12 | ॐ भास्कराय नमः | प्रकाश देने वाले सूर्य को नमस्कार |
सूर्य नमस्कार की 12 स्थिति (Positions)
सूर्य नमस्कार में कुल 12 स्थितियां होती हैं जिन्हें क्रम से करना चाहिए।
- 1. प्राणायाम आसन (Prayer Position) – सूर्य नमस्कार की पहली स्थिति प्राणायाम आसन है। इसमें दोनों पैर मिलाकर सीधे खड़े हो जाते हैं और हाथों को जोड़कर छाती के सामने नमस्कार की मुद्रा में रखते हैं।
- 2. हस्त उत्तानासन – इसमें दोनों हाथों को ऊपर उठाकर शरीर को पीछे की ओर झुकाया जाता है।
- 3. हस्त पादासन – इसमें शरीर को आगे की ओर झुकाकर हाथों को पैरों के पास जमीन पर रखा जाता है।
- 4. अश्व संचालन आसन – इसमें एक पैर पीछे की ओर ले जाकर दूसरा पैर आगे मोड़ा जाता है और चेहरा सामने की ओर रहता है।
- 5. पर्वतासन – इस आसन में शरीर की आकृति पर्वत जैसी हो जाती है। दोनों हाथ और पैर जमीन पर रहते हैं और कमर ऊपर की ओर उठती है।
- 6. अष्टांग नमस्कार – इसमें शरीर के आठ अंग जमीन को स्पर्श करते हैं जैसे दाढ़ी, छाती, दोनों हाथ, दोनों घुटने और दोनों पैर के पंजे।
- 7. भुजंगासन – इसमें कमर से ऊपर का भाग उठाकर शरीर को पीछे की ओर झुकाया जाता है।
- 8. पर्वतासन – पुनः शरीर को पर्वत की मुद्रा में लाया जाता है।
- 9. अश्वसंचालन आसन – इस बार दूसरा पैर आगे लाया जाता है और पहला पैर पीछे जाता है।
- 10. हस्त पादासन – शरीर को आगे झुकाकर सिर को घुटनों के पास लाया जाता है।
- 11. हस्त उत्तानासन – शरीर को पीछे की ओर झुकाया जाता है।
- 12. प्रणाम आसन – अंत में दोनों हाथ जोड़कर प्रार्थना की स्थिति में खड़े हो जाते हैं।
सूर्य नमस्कार करने के वैज्ञानिक लाभ (Latest Research 2024-2026)
आधुनिक शोध के अनुसार सूर्य नमस्कार एक सम्पूर्ण व्यायाम है। कई योग रिसर्च संस्थानों ने यह पाया है कि प्रतिदिन 10 से 15 मिनट सूर्य नमस्कार करने से शरीर के कई स्वास्थ्य लाभ प्राप्त होते हैं।
- शरीर की मांसपेशियां मजबूत होती हैं
- रक्त संचार बेहतर होता है
- वजन नियंत्रण में मदद मिलती है
- पाचन तंत्र मजबूत होता है
- मानसिक तनाव और चिंता कम होती है
- लचीलापन बढ़ता है
- हृदय स्वास्थ्य बेहतर होता है
- फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है
सूर्य नमस्कार किसे नहीं करना चाहिए
- शारीरिक दुर्बलता – यदि किसी व्यक्ति के शरीर में अधिक कमजोरी हो तो डॉक्टर की सलाह से ही सूर्य नमस्कार करना चाहिए।
- उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) – जिन लोगों को उच्च या निम्न रक्तचाप की समस्या है उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।
- हृदय रोग – दिल की गंभीर समस्या वाले लोगों को सूर्य नमस्कार नहीं करना चाहिए।
- कमर या मेरुदंड की समस्या – जिन लोगों की रीढ़ की हड्डी में समस्या है उन्हें यह आसन नहीं करना चाहिए।
सूर्य नमस्कार करते समय सावधानियां
- हमेशा प्रातः काल खाली पेट सूर्य नमस्कार करें
- समतल भूमि पर योगा मैट का उपयोग करें
- धीरे-धीरे अभ्यास शुरू करें
- शरीर की क्षमता से अधिक जोर न लगाएं
सूर्य नमस्कार कैसे करते हैं (वीडियो)
FAQ – सूर्य नमस्कार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न
प्रश्न 1 : सूर्य नमस्कार कितनी बार करना चाहिए?
शुरुआत में 5 से 10 बार और धीरे-धीरे 12 से 24 बार तक किया जा सकता है।
प्रश्न 2 : सूर्य नमस्कार करने का सही समय क्या है?
सूर्योदय के समय खाली पेट करना सबसे अच्छा माना जाता है।
प्रश्न 3 : क्या सूर्य नमस्कार से वजन कम होता है?
हाँ, नियमित अभ्यास से शरीर की कैलोरी बर्न होती है और वजन नियंत्रण में मदद मिलती है।
प्रश्न 4 : सूर्य नमस्कार बच्चों के लिए लाभदायक है?
हाँ, यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए लाभदायक है।
निष्कर्ष
सूर्य नमस्कार योग का एक महत्वपूर्ण अभ्यास है जिसमें 12 आसनों का संयोजन होता है। यदि प्रतिदिन सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया जाए तो यह शरीर को स्वस्थ, मजबूत और ऊर्जावान बनाता है। इसलिए हर व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में सूर्य नमस्कार को अवश्य शामिल करना चाहिए।
