शशांकासन कैसे करते हैं (Shashank asana kaise karte hai) इसके द्वारा कौन से रोग दूर होते हैं

शशांकासन (Shashankasana) क्या है? विधि, 13+ जबरदस्त लाभ और सावधानियां

मानसिक शांति और तनाव मुक्ति के लिए योग विज्ञान में शशांकासन (Shashankasana) को सर्वोत्तम माना गया है। 'शशांक' एक संस्कृत शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है— 'शश' (खरगोश) और 'अंक' (गोद)। इस आसन को करते समय शरीर की आकृति एक खरगोश (Rabbit) के समान हो जाती है, इसलिए इसे अंग्रेजी में "Rabbit Pose Yoga" भी कहा जाता है।

शशांकासन क्या है? (Meaning of Shashankasana)

शशांकासन एक बेहद सरल और आरामदायक आसन है जिसे वज्रासन की मुद्रा में बैठकर किया जाता है। यह आसन न केवल शरीर को लचीला बनाता है, बल्कि यह क्रोध, अहंकार और मानसिक उत्तेजना को शांत करने के लिए प्रसिद्ध है। हमारा उद्देश्य आपको योग के माध्यम से एक तनावमुक्त जीवन की ओर ले जाना है।

शशांकासन कैसे करते हैं? (Method of Shashankasana)

सही तकनीक से किया गया योग ही पूर्ण लाभ देता है। नीचे दी गई विधि का पालन करें:

  1. प्रारंभिक स्थिति: सबसे पहले एक शांत वातावरण में योग मैट बिछाकर वज्रासन में बैठ जाएं।
  2. सांस और हाथ: गहरी सांस भरते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर की ओर उठाएं। ध्यान रहे कि आपके कंधे कानों से सटे रहें।
  3. झुकना: अब धीरे-धीरे सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें। अपनी हथेलियों और कोहनियों को जमीन पर टिकाएं।
  4. अंतिम मुद्रा: अपनी ठुड्डी (Chin) को जमीन पर स्पर्श करने का प्रयास करें और सामने की ओर देखें।
  5. सांसों की गति: इस स्थिति में सामान्य सांस लेते रहें।
  6. वापसी: सांस भरते हुए धीरे-धीरे वापस ऊपर आएं और वज्रासन की स्थिति में बैठ जाएं। शुरुआत में इसे 2 से 3 बार दोहराएं।

शशांकासन करने के लाभ (Benefits of Shashankasana)

शशांकासन का नियमित अभ्यास शरीर के विभिन्न अंगों और मानसिक स्वास्थ्य के लिए चमत्कारिक है:

1. हृदय रोग: यह हृदय की कार्यप्रणाली को सुचारू कर दिल के मरीजों को राहत देता है।
2. कमर दर्द: रीढ़ की हड्डी के तनाव को कम कर पुराने कमर दर्द में आराम पहुंचाता है।
3. पेट की चर्बी: आगे झुकने से पेट की मांसपेशियों पर दबाव पड़ता है, जिससे मोटापा कम होता है।
4. यकृत (Liver): यह लिवर को उत्तेजित कर शरीर की अशुद्धियों को फिल्टर करने में मदद करता है।
5. अग्न्याशय (Pancreas): यह इंसुलिन के रिसाव को नियमित कर डायबिटीज में लाभ देता है।
6. तनाव और चिड़चिड़ापन: यह मानसिक थकान दूर कर स्वभाव को शांत और प्रसन्न बनाता है।
7. याददाश्त और आंखें: मस्तिष्क में रक्त संचार बढ़ने से याददाश्त तेज होती है और आंखों की रोशनी बढ़ती है।
8. महिलाओं के लिए: मासिक धर्म (Periods) की अनियमितता को दूर करने में सहायक है।
9. यौन और प्रजनन अंग: यह प्रजनन अंगों के विकारों को दूर कर उन्हें मजबूती देता है।

महत्वपूर्ण सावधानियां (Precautions)

सुरक्षित योगाभ्यास के लिए इन बातों का ध्यान रखना अनिवार्य है:

  • गर्भावस्था: गर्भवती महिलाओं को दूसरे महीने के बाद यह आसन नहीं करना चाहिए।
  • उच्च रक्तचाप: हाई बीपी (High Blood Pressure) के रोगियों को इसे करने से बचना चाहिए।
  • रीढ़ की समस्या: यदि रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट या हाल ही में ऑपरेशन हुआ है, तो यह आसन न करें।
  • चक्कर आना: यदि आपको कमजोरी के कारण चक्कर आ रहे हों, तो अभ्यास न करें।
  • पोशाक: अभ्यास के दौरान हमेशा ढीले और आरामदायक सूती वस्त्र पहनें।
  • समतल स्थान: हमेशा समतल भूमि पर योग मैट बिछाकर ही अभ्यास करें।

वीडियो ट्यूटोरियल: शशांकासन की सही तकनीक


अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या शशांकासन गुस्से को कम करता है?
उत्तर: हाँ, यह मस्तिष्क की नसों को शांत करता है, जिससे क्रोध और तनाव पर नियंत्रण पाने में मदद मिलती है।

प्रश्न 2: क्या इसे खाने के बाद कर सकते हैं?
उत्तर: नहीं, किसी भी योग की तरह इसे खाली पेट करना ही श्रेष्ठ है। वज्रासन (जिसमें यह बैठकर किया जाता है) को खाने के बाद किया जा सकता है, लेकिन शशांकासन में आगे झुकना होता है, इसलिए खाली पेट ही करें।

प्रश्न 3: क्या इसे बच्चे कर सकते हैं?
उत्तर: हाँ, बच्चों की एकाग्रता और याददाश्त बढ़ाने के लिए यह एक उत्कृष्ट आसन है।

निष्कर्ष: शशांकासन आधुनिक जीवनशैली के तनाव को दूर करने का एक प्राकृतिक और प्रभावी तरीका है। यदि आप भी शांति और उत्तम स्वास्थ्य चाहते हैं, तो आज से ही इस सरल योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

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